नकद लाभ अनुपात (Cash Profit Ratio)

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Cash Profit Ratio alloverindia.in

संस्था का शुद्ध लाभ प्रभारित ह्रास की राशि पद्धति से प्रभावित होते हैं। अतः ह्रास जो एक गैर-नकद व्यय होता है, तो ध्यान में रखते हुए नकद लाभ अनुपात की गणना करना बेहतर होता है। यह अनुपात परिचालन से सृजित रोकड़ एवं शुद्ध लाभ के पारस्परिक संबंध की माप करता है। इस प्रकार,:

Cash Profit Ratio = Cash Profit / Net Sales * 100

यथा, नकद लाभ (Cash Profit) = शुद्ध लाभ + ह्रास

निवेश विश्लेषण की समग्र कार्यक्षमता का माप होता है। व्यवसाय में जितना अधिक लाभ होगा, वह उतना ही अधिक कार्यशील माना जाता है। उदाहरण के लिए, कंपनी अ 50, 000 रु लाभ अर्जित करती है, जबकि कम्पनी ब केवल 40, 000 रु। कम्पनी अ को इस दृष्टि से अच्छा माना जाएगा। यघपि कुल लाभो में होने वाले परिवर्तन  का परिचायक होते हैं, किन्तु वे व्यवसाय की कुशलता की सच्ची स्थिति अथवा लाभदायकता की ओर कोई संकेत नहीं करते हैं जब तक कि लाभों का विनियोग  के आकर के साथ संबंध न स्थापित किया जाय। जैसे, पूर्वोक्त उदारहण में यदि कम्पनी अ  के कुल विनियोग 5, 00,000 रु हैं  जबकि कम्पनी ब के कुल विनियोग 2, 00, 000 रु हैं; कम्पनी अ (50, 000 : 5, 00, 000) की तुलना में कम्पनी ब (40, 000 : 2, 00, 000) अधिक ऊँचा लाभ दे  रही है। इस प्रकार,  सम्पूर्ण  कार्यकुशलता की माप व्यवसाय में किये गए विनियोगों के साथ संबद्ध लाभो के परिप्रेश्य में की जा सकती है।

अंशधारकों के विनियोग या शुद्ध मूल्य पर प्रत्याय (Return on Shareholders’ Investment or Net Worth)

अंशधारकों के विनियोग पर प्रत्याय जो नाम से अधिक लोकप्रिय है, अथवा अंशधारकों/ स्वामियों (Return on Shareholders’? Proprietors’ Funds) के कोष पर प्रत्याय ब्याज व कर के पश्चात्  शुद्ध लाभ एवं स्वामियों के कोष के बीच संबंध होता है। इस प्रकार,

Return on Shareholders’ Investment = Net Profit (after interest & tax) / Shareholders’ Funds

उपर्युक्त सूत्र में 100 गुणा सामान्यतः इस अनुपात की प्रतिशत में गणना करते हैं।

इस अनुपात के दो मूल अवयव शुद्ध लाभ तथा अंशधारकों के कोष हैं। अंशधारकों के समता  पूँजी, पूर्वाधिकार अंश पूँजी, स्वंतत्र संचय जैसे अंश प्रीमियम, आयगत संचय, पूँजी संचय, प्रतिधारित अर्जन एवं हानियाँ घटाकर, यदि कोई हो, आधिक्य सम्मिलित किये जाते हैं। स्वामियों यानी अंशधारकों की दृष्टि से शुद्ध लाभ पर विचार किया जाता है। इस प्रकार, दीर्घ-कालीन ऋणों पर ब्याज एवं आयकर घटाने के बाद शुद्ध लाभ ज्ञात किया जाता है, क्योंकि अंशधारकों के लिए ये ही लाभ उपलब्ध होते हैं। अतएवं,

Shareholders’ investment = Equity share Capital + Preference share capital + Reserve & Surplus- (Accumulated Losses, any)

Net Profit = Net Profit after payment of interest and taxes.

विनियोग पर प्रत्याय का निर्वचन तथा महत्व (Interpretattion and Significance of ROI)

किसी संस्था की समग्र लाभदायकता की माप करने के लिए प्रयुक्त किये जाने वाले अनुपातों में से यह सबसे अधिक महत्वपूर्ण  अनुपात है। चूँकि व्यवसाय का प्राथमिक उद्देश्य आय को अधिकतम करना होता है, अतः यह अनुपात बतलाता है कि व्यवसाय का यह प्राथमिक उद्देश्य किस सीमा तक प्राप्त किया गया है। अंशधारकों के साथ -साथ कम्पनी के प्रबंध के लिए बहुत महत्व रखता है। चूँकि यह अनुपात प्रकट करता   संस्था के संसाधनो का कितनी अच्छी तरह प्रयोग किया जा रहा है, अतएवं ऊँचा अनुपात अच्छे परिणाम का घोतक होता है। किसी संस्था के अंशधारकों के विनियोग पर प्रत्याय की उसी में कार्यरत अन्य वैसी ही संस्थाओं के प्रत्याय से तुलना करनी चाहिए। इस अनुपात की अन्तर-संस्था तुलना यह निर्धारित करती है कि संस्था में विनियोग करना आकर्षक है या नहीं क्योंकि विनियोगकर्ता तभी विनियोग करना चाहेंगे जबकि प्रत्याय ऊँचा हो। इसी  प्रकार,  कम्पनी की लाभदायकता तथा कार्यकुशलता में समृद्धि, विकास या गिरावट के बारे में जानकारी प्राप्त करने हेतु पिछले कई वर्षों के लिए प्रवृति अनुपातों की गणना की जा सकती है।

समता पूँजी पर प्रत्याय (Return on Equity Capital)

वास्तविक अर्थ में, साधारण अंशधारक कम्पनी के वास्तविक स्वामी होते हैं। वे कम्पनी में सबसे अधिक जोखिम उठाते हैं। पूर्वाधिकार अंशधारकों को साथ-साथ पूँजी के भुगतान में साधारण अंशधारकों पर प्राथमिकता प्राप्त होती है। पूर्वाधिकारी अंशधारक कम्पनी के लाभ की मात्रा पर ध्यान दिए बिना स्थिर दर से लाभांश प्राप्त करते हैं। केवल साधारण अंशो की दशा में लाभांश की दर में लाभ की उपलब्धता के साथ परिवर्तन होता है। इस प्रकार, साधारण अंशधारकों की एक कम्पनी की लाभदायकता में अधिक रूचि होती है। इसलिए कम्पनी के निष्पादन का परीक्षण उसकी समता पूँजी पर प्रत्याय के आधार पर किया जाना चहिए। समता पूँजी पर प्रत्याय, जो कम्पनी के लाभ एवं उसकी समता पूँजी  के बीच संबंध होता है, कि गणना निम्न प्रकार की जा सकता है:

Return on Equity Capital = Net Profit after tax – Preference Dividend / Equity Share Capital (Paid-up)

उपर्युक्त अनुपात में थोड़ी भिन्नता आ जाती कुल समता पर प्रत्याय  गणना अंश पूँजी, संचय व आधिक्य और प्रीमियम के योग, जिसमे से एकत्रित हानि घटाने पर, यदि कोई हो, के बराबर होता है।

यह अनुपात समता अंशधारकों अधिक अर्थपूर्ण होता है जो कम्पनी के अर्जित लाभ तथा उस को जानने में हित रखते है

यह अनुपात समता अंशधारकों के लिए अधिक होता है जो कम्पनी के अर्जित लाभ उस लाभ को जानने में हित रखते हैं जो उनको लाभांश देने के लिए उपलब्ध होता है। इस अनुपात का निर्वचन अंशधारकों के विनियोग पर प्रत्याय  के निर्वचन के समान किया जाता है और यह अनुपात जितना ऊँचा होगा, उतना ही अच्छा माना जाता है।

प्रति अंश अर्जन (Earning per Share)

प्रति अंश अर्जन समता पूँजी पर प्रत्याय  से थोड़ा परिवर्तन है और इसकी गणना करों तथा पूर्वाधिकार लाभांश के पश्चात् शुद्ध लाभ में समता अंशों की कुल संख्या से भाग देकर की जाती है। इस प्रकार,

E.P.S. = Net Profit after tax- Preference Dividend / No. of Equity Share

प्रति अंश लाभदायकता को एक अच्छा माप माना जाता है और अन्य कम्पनियों की प्रति अंश अर्जन से तुलना केने पर यह संस्था की तुलनात्मक अर्जन या अर्जन शक्ति का चित्र प्रस्तुत करता है। अनेक वर्षों के लिए निकाले गए प्रति अंश अर्जन इस संकेत करते है कि क्या कम्पनी की अर्जन शक्ति में वृद्धि हुई है या नहीं।

विनियो जित पूँजी पर प्रत्याय लाभ और विनियोजित पूँजी के मध्य संबंध स्थापित करता है। इसे एक मूल या प्राथमिक अनुपात माना जाता है और एक व्यवसाय की समग्र लाभदायकता और कार्यकुशलता की माप के लिए इसका विस्तृत रूप से प्रयोग किया जाता है।

‘विनियोजित पूँजी ‘ शब्दावली का आशय एक व्यवसाय में लगाये गए कुल विनियोग से होता है और इसे कई ढंगों से पृबाषित किया जा सकता है। इस शब्दावली का सर्वाधिक प्रयोग की जाने वाली तीन परिभाषायें निम्नांकित किया जाता है:

अ) सकल विनियोगजित पूँजी (Gross Capital Employed)

ब) शुद्ध विनियोजित पूँजी (Net Capital Employed)

स) स्वामियों की शुद्ध विनियोजित पूँजी (Proprietos’ net

अ) सकल विनियोजित पूँजी – सामान्यतः ‘सकल विनियोजित पूँजी’ में व्यवसाय में लगाये गये कुल सम्पत्तियाँ, यानी स्थायी के साथ-साथ चालू सम्पत्तियाँ दोनों ही शामिल की जाती है।

Gross Capital Employed = Fixed Assets + Current Assets

ब) शुद्ध विनियोजित पूँजी ‘शुद्ध विनियोजित पूँजी’ शब्दावली का आशय व्यवसाय में प्रयुक्त कुल सम्पतियों, जिनमे से चालू दायित्वों को घटा दिया जाता है, से है।

Net Capital Employed = Total Assets – Current Liabilities

स) स्वामियों की शुद्ध विनियोजित पूँजी ‘स्वामियों की शुद्ध विनियोजित पूँजी का तात्पर्य  व्यवसाय में किये विनियोग अथवा अंशधारकों कर कोष से है। इस शब्दावली का प्रयोग अंशधारकों के विनियोग पर प्रत्याय की भाँति किया जाता हा जिसका पिछले पृष्ठों में विवेचन किया जा चुका है।

Proprietors’ Net Capital Employed = Fixed Assets + Current Assets – Outside Liabilities

विनियोजित पूँजी की संगणना (Computation of Capital Employed)

अ) सम्पति दृष्टि विधि (Assets Approach Method) – चूँकि विनियोजित पूँजी में व्यवसाय में प्रयुक्त कुल सम्पतियों को शामिल किया जाता है, अतएवं, निम्नांकित को जोड़कर इसकी संगणना की जा सकती है:

(1) व्यवसाय में प्रयोग की जाने वाली सभी स्थायी सम्पत्तियाँ जैसे, भूमि व भवन, संयन्त्र व मशीनरी, फर्नीचर व फीटिंग्स, आदि। स्थायी सम्पतियों को, या प्रतिस्थापन लागत में से ह्रास घटाने के पश्चात उनके शुद्ध मूल्य पर सम्मिलित किया जाना चाहिए। मुद्रा स्फीति की स्थिति में, स्थायी सम्पतियों को उनकी प्रतिस्थापन लागत पर सम्मिलित करना चाहिए, क्योकि यह इन सम्पतियों का चालू बाजार मूल्य होता है।

(2) व्यवसाय के अंदर किये गए विनियोग।

(3) सभी चालू सम्पत्तियाँ जैसे, हस्तस्थ रोकड़, बैंक, में रोकड़, विविध देनदार, प्राप्य विपत्र, स्कंध, आदि।

(4) शुद्ध विनियोजित पूँजी ज्ञात करने के लिए उपर्युक्त प्रकार से गणना की गयी सम्पतियों के योग में से चालू दायित्वों को घटा दिया जाता है।

विनियोजित पूँजी की संगणना करते समय निम्नांकित बातों को ध्यान में रखना चाहिए:

  • बेकार सम्पत्तियाँ -वे सम्पत्तियाँ जो व्यवसाय में प्रयोग नहीं की जा सकती हैं, विनियोजीत पूँजी में शामिल नही की जनि चाहिए। किन्तु अतिरिक्त खाली पड़े औसत विनियोजित पूँजी

कभी-कभी औसत विनियोजित पूँजी को गणना संयंत्र व मशीनरी जो व्यवसाय के सामान्य परिचालन के लिए आवश्यक है, को सम्मिलित करना चाहिए।

(ब) अमूर्त सम्पतियों (Intangible assets) जैसे ख्याति, एकस्व,(Patent), व्यापार चिन्ह, अधिकार, आदि को शामिल नहीं  करना चाहिए। किन्तु, यदि इनका कोई बिक्री मूल्य (sale value) हो अथवा इन्हें क्रय किया गया हो तो सम्मिलित करना चाहिए।

(स) व्यवसाय के बाहर किये गये विनियोग को शामिल नहीं करना चाहिए।

(द) व्यवसाय के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक रोकड़ से अधिक रोकड़ या बैंक शेष को शामिल नहीं करना चाहिए।

 (य) कृत्रिम सम्पतियों (Fictitious Assets) जैसे प्रारम्भिक व्यय, एकत्रित हानियों, अंशों या ऋणपत्रों के निर्गमन पर कटौती, विज्ञापन, उचन्त खाता (suspense account) आदि को शामिल नहीं करना चाहिए।

 (र) अप्रचलित सम्पतियों (Obsolete Assets) जिनका व्यवसाय में प्रयोग नहीं किया जा सकता है, तथा अप्रचलित स्कंध (Obsolete Stock) जिनकी बिक्री नहीं जा सकती है, को सम्मिलित नहीं किया जाना चाहिए।

दायित्व दृष्टिकोण विधि (Liabilities Approach Method) -आर्थिक चिट्ठे के दायित्व पक्ष के आधार पर विनियोजित पूँजी की संगणना करने की एक वैकल्पिक विधि भी है जसके अन्तर्गत सभी, दायित्वों का योग कर लिया जाता है तथा प्रतिस्थापन लागत पर के मूल्य में वृद्धि और कृत्रिम, अमूर्त बेकार व अप्रचलित सम्पतियों के लिए समायोजन किया जाता है।

औसत विनियोजित पूँजी (Average Capital Employed)

कभी- कभी औसत विनियोजित पूँजी को गणना हेतु वरीयता दी जाती है क्योंकि यह माना  जाता है कि अर्जन औसत रूप से रक विशेष अवधि के लिए एक समान होता है। वर्ष के प्रारम्भ की विनियोजित पूँजी और अंत की विनियोजित औसत को पूरे वर्ष के लिए पूँजी की राशि मानते हैं। वर्ष के अन्त के विनियोजित पूंजी में से वर्ष में अर्जित  लाभ का आधा हिस्सा घटा कर अथवा वर्ष के प्रारम्भ की विनियोजित में पूँजी में लाभ का आधा भाग जोड़कर औसत  विनियोजित पूँजी को ज्ञात किया जा सकता है। यह माना  जाता है कि वर्ष के दौरान पूँजी में वृद्धि उक्त अवधि में अर्जित लाभ के कारण हुई है। वर्ष के प्रारम्भ तथा अन्त की विनियोजित पूँजी अन्तर  वर्ष में अर्जित लाभ की राशि के बराबर होता है। औसत विनियोजित पूँजी की गणना निम्न प्रकार की जा सकती है:

A Average Capital Employed = Opening Capital employed +Closing Capital employed / 2

B Average Capital Employed = Closing Capital Employed- ½ of Profit earned during the year.

C Average Capital Employed = Opening Capital Employed + ½ Profit earned during the year.

विनियोजित पूँजी पर प्रत्याय की गणना करने के प्रयोजन के लिए लाभ की संगणना ‘विनियोजित पूँजी’ की अवधारणा के अनुसार करनी चाहिए। व्यवसाय में प्रयुक्त विनियोजित पूँजी पर अर्जित लाभ को ही अनुपात की गणना हेतु लाभ माना जाता है। इस प्रकार, शुद्ध लाभ में निम्नांकित का समायोजन करना पड़ता है:

(अ) कर अथवा करारोपण के लिए प्रावधान के पूर्व के शुद्ध लाभ को लिया जाना चाहिए क्योंकि लाभ के अर्जित होने के उपरांत ही कर चुकाया जाता है तथा कर का व्यवसाय की लाभार्जन क्षमता से कोई संबंध नहीं होता है।

(ब) यदि विनियोजित पूँजी को ‘सकल विनियोजित पूँजी’ के अर्थ के अर्थ में लिया जाय तो दीर्घ -कालीन के साथ-साथ अल्प-कालीन ऋणों पर ब्याज के भुगतान के पूर्व शुद्ध लाभ को विचारार्थ लिया जाना चाहिए।

(स) यदि विनियोजित पूँजी को ‘शुद्ध विनियोजित पूँजी’ के अर्थ में लिया जाय तो केवल दीर्घ-कालीन ऋणों पर ब्याज को शुद्ध लाभ में जोड़ देना चाहिए तथा अल्प-कालीन ऋणों पर ब्याज को नहीं जोड़ना चाहिए क्योंकि शुद्ध विनियोजित पूंजी की गणना करते समय चालू दायित्वों को घटा दिया जाता है।

(द) यदि विनियोजित पूँजी की गणना करते समय किसी सम्पति को छोड़ दिया गया है तो शुद्ध लाभ की गणना करते समय ऐसी सम्पतियों पर होने वाली आय को भी छोड़ देना चाहिए। उदाहरण के लिए व्यवसाय के बाहर किये गए विनियोगों पर ब्याज को शमिल नहीं करना चाहिए।

(य) किसी असामान्य, अनावर्तक, गैर -परिचालन लाभ या हानियों, जैसे स्थायी सम्पतियों की बिक्री  पर लाभ/ हानि को शुद्ध में समायोजित कर लेना चहिए।

(र) यदि सम्पतियों को प्रतिस्थापन लागत पर सम्मिलित किया गया है तो प्रतिस्थापन लागत पर आधारित ह्रास का शुद्ध लाभ में समतोजन कर लेना चहिए।

विनियोजित पूँजी पर प्रत्याय की गणना के लिए निम्नांकित सूत्रों को प्रयोग किया जाता है:

Return on Gross Capital Employed = Adjusted Net Profits / gross Capital Employed *100

Return on Net Capital Employed = Adjusted Net Profits / Net Capital Employed *100

विनियोजित पूंजी पर प्रत्याय का महत्व (Singnificance of Return on Capital Employed)

विनियोजित पूँजी पर प्रत्यय एक ऐसा प्रमुख अनुपात है तो व्यवसाय की कुशलता का माप करता है। निम्नलिखित कारणों से इस अनुपात के अध्ययन का महत्व है:

1 यह व्यवसाय के कार्य- कुशलता का प्रमुख परीक्षण है। यह न केव व्यवसाय के संगर कार्य-कुशलता की ही हैं। वरन यह विभिन्न विभागों के कार्य-निष्पादन के मूल्यांकन ने भी सहायता प्रदान करना है।

2 स्वामी व्यवसाय में अपने द्धारा विनियोजित रकम में संदर्भ में उसकी लाभदायकता जानने केलिए उत्सुक रहते हैं। विनियोजित पूंजी पर प्रत्याय की ऊँची प्रतिशत दर स्वामियों को यह संतुष्ट करने के लिए पर्याप्त होती है कि उनके धन का लाभप्रद ढंग से उपयोग किया जा रहा है।

3 अन्तर संस्था और अभ्यन्तरः संस्था तुलनाओं की द्धारा अन्य प्रतिष्ठानों में संबंध में उपक्रम के निष्पादन का मूल्यांकन किया जा रहा है।

4 उपक्रम की उधार नीति भी उचित प्रकार से निर्धारित की जा सकती है। उधार पर ब्याज की दर सदेव विनियोजित पूँजी पर प्रत्याय से कम होनी चाहिए।

5 बाह्रा पक्ष जैसे बैंकर, लेनदार, वित्तीय संस्थान यह मालूम करने में संरथ हो सकते हैं कि प्रतिष्ठानो को साख देने या ऋण स्वीकृत करने की दृष्टि से वह जीवन- क्षम है अथवा नहीं।

6 विस्तार अथवा विविधीकरण, आदि के लिए व्यावसायिक नीतियों को निरूपित करने में विनियोजित पूंजी पर प्रत्याय सहायक हो सकता है।

7 यह उत्पादन के विभिन्न घटको को उचित पारिश्रमिक उपलब्ध करने में सहायता पहुँचाता है। प्रबंध -तंत्र विनियोग पर प्रत्याय की दर में वृद्धि के लिए उत्पादन के विभिन्न घटको के अधिकतम उपयोग का लक्ष्य रखता है। ऊँचा प्रत्याय की दर में वृद्धि के लिए उत्पादन के अन्य घटको को बेहतर भुगतान करने का अवसर प्रदान करता है।

(v) सम्पतियों पर प्रत्याय (Return on Assets)

सम्पतियों पर प्रत्याय जो के नाम से जाना जाता है शुद्ध लाभों और उन लाभों को कमाने में विनियोजित सम्पतियों में संबंध है। यह अनुपात फर्म में विनियोजित सम्पतियों से संबंधित फर्म की लाभदायकता का माप करता है। इस प्रकार

Return on Assets = Net Profit after Tax / Average Total Assets

(vi) पूँजी आवर्त अनुपात (Capital turnover Ratio)

पूंजी आवर्त अनुपात बिके माल की लागत एवं विनियोजित पूंजी के मध्य संबंध बतलाता है इस अनुपात की लागत की गणना उस कार्यदक्षता या प्रभावोत्पादकता की माप करने के लिए की जाती है जिससे एक फर्म अपने संसाधनों या विनियोजित पूँजी का उपयोग करती है। चूँकि किसी व्यवसाय में पूँजी का निवेश करने तथा लाभ अर्जित करने के लिए किया जाता है, अतः यह अनुपात संस्था की सम्पूर्ण लाभदायकता का एक संकेतक माना जाता है। इस अनुपात की गणना ते लिए निम्न सूत्र का प्रयोग करते है:

Capital turnover Ratio = Cost of Goods sold or Sales / Capital employed

किसी व्यवसाय में विनियोजित पूँजी में (i) स्थायी एवं (ii) कार्यशील पूँजी के रूप में निवेश होता है, अतः पूँजी आवर्त अनुपात की इस प्रकार वर्गीकृत सकता है:

(i) स्थायी संपत्ति आवर्त (Fixed Assets Turnover)

(ii) कार्यशील पूंजी आवर्त (Working capital)

‘स्थायी सम्पति आवर्त’ बिके माल की लागत या बिर्की एवं व्यवसाय में लगी स्थायी/ पूंजीगत सम्पतियों के बीच संबंध होता है। ‘कार्यशील पूंजी आवर्त ‘ शुद्ध कार्यशील पूंजी के उपयोग कोवेग का प्रतीक होता है। इनकी गणना इस प्रकार की जाती है:

Fixed Asstes turnover Ratio = Cost of Goods Sold or Sales / Fixed/ Capital Assets Employed

कार्यशील पूंजी आवर्त अनुपात’ को (i) स्कंध आवर्त अनुपात (ii) देदार आवर्त अनुपात एवं (iii) लेनदार आवर्त अनुपात में विभक्त किया जा सकता है। इस अनुपातों का विवेचन पूर्व में, चालू सम्पति संचरण अथवा क्रिया शील अनुपात शीर्षक के अन्तर्गत किया जा चुका है।

लाभदायकता अनुपातों का अन्तर -संबंध (Inter-Relationship of Profitability ratio)

विभिन्न लाभदायकता अनुपातों का एक दूसरे से प्रत्यक्ष संबंध होता है। बिके माल की लागत या प्रशासन व कार्यालय व्यय या बिक्री व वितरण व्यय अनुपात में परिवर्तन शुद्ध लाभ को प्रभावित करते है। इसी प्रकार, विनियोजित पूँजी या  निवेश पर प्रत्याय का शुद्ध लाभ और पूंजी आवर्त अनुपात से प्रत्यक्ष संबंध होता है। वस्तुतः शुद्ध लाभ और शुद्ध और लाभ और पूँजी आवर्त अनुपात या इन दोनों ही को सुधार करके विनियोजित पूंजी पर प्रत्याय  में सुधार  किया जा सकता है। शुद्ध लाभ अनुपात, पूंजी आवर्त अनुपात एवं विनियोजित पूंजी पर प्रत्याय के बीच संबंध को निम्न प्रकार व्यक्त किया जा सकता है।

Returned on Capital Employed = Net Profit (Return) / Capital Employed

Or Return on Capital Employed = Net profit / sales * Sales / Capital Employed *100

स) बाजार परीक्षण अथवा मूल्यांकन अनुपात (Market Test or Valuation Ratio)

(i) लाभांश प्रतिफल अनुपात (Dividend Yield Ratio)

अंशधारक किसी कम्पनी के वास्तविक स्वामी होते है एवं वे वास्तव में रूचि रखते है कि आय के कितने भाग का लाभांश के रूप में वितरण और भुगतान किया गया है। इसलिए भुगतान किया गया प्रति अंश लाभांश तथा अंश के बाजार मूल्य के बीच संबंध का मूल्यांकन लाभांश प्रतिफल या उत्पति अनुपात का गणना की जाती है जिसके लिए निम्नांकित सूत्र है:

Dividend Yield Ratio = Dividend per share / Market value per share

Dividend per Share = Dividend paid to Shareholders / Number of Shares

(ii) लाभांश भुगतान अनुपात या भुगतान अनुपात (Dividend Pay-out Ratio or Pay-Out Ratio)

लाभांश भुगतान अनुपात लाभांश भुगतान के लिए प्रयुक्त प्रति अंश अर्जन आय की सीमा ज्ञात करने यह जानने के लिए कि अर्जन का कितना भाग व्यवसाय में प्रतिधारित किया गया है, की जाती है । यह एक महत्वपूर्ण अनुपात माना जाता हो क्योंकि लाभ का पुनर्विनियोग एक व्यवसाय के विकास को सम्भव बनता है तथा भविष्य में अधिक लाभांश देना भी सम्भव होता है। उसके लिए निम्न सूत्र का प्रयोग किया जाता है:

Dividend pay-out Ratio = Dividend per Equity share / Earning per share

   (iii) मूल्य-अर्जन अनुपात (Price Earnings Ratio)

मूल्य- अर्जन अनुपात प्रति अंश बाजार मूल्य और प्रति अंश अर्जन के बीच संबंध बतलाता है। किसी कम्पनी के एक अंश के मूल्य नमे हुई वृद्धि का अनुमान करने के लिए इस अनुपात की गणना की जाता है तथा किसी कम्पनी विशेष में अंशो को क्रय किया जाय या नहीं, यह निर्णय करने के लिए विनियोजको द्धारा इस अनुपात का बहुत अधिक प्रयोग किया जाता है। अनुपात की गणना निम्न प्रकार की जाती है:

Price Earnings Ratio = Market Price per Equity share / Earning per Share

सामान्यतः मूल्य-अर्जन अनुपात जितना अधिक ऊँचा हप्ता है, वह उतना ही अच्छा माना जाता है। यदि P /E   अनुपात गिरता है, तो प्रबंध को उन कारणों पर ध्यान देना चाहिए जिसके परिणामस्वरूप इस अनुपात में गिरावट आयी है।

(iv) अर्जन प्रतिफल अनुपात (Earning Yield Ratio)

यह अनुपात भी प्रति अंश अर्जन और अंशों के बाजार मूल्य में संबंध व्यक्त करता है। इसकी निम्न प्रकार गणना कर सकते है

Earning Yield Ratio = Earnings per share / Market price share * 100

(v) बाज़ार मूल्य का पुस्तकीय मूल्य अनुपात

बाज़ार मूल्य का पुस्तकीय मूल्य से अनुपात किसी संस्था के प्रति अंश बाज़ार मूल्य एक\व्वं पीटीआई अंश पुस्तकीय मूल्य के मध्य संबंध होता है। इस प्रकार,

Market price to Cash Flow = Market price per share/ Book value per share

(vi) बाज़ार मूल्य रोकड़ प्रवाह से अनुपात (Market Price to Cash Flow)

बाज़ार मूल्य का रोकड़ प्रवाह से अनुपात से अनुपात किसी फर्म के प्रति अंश बाज़ार मूल्य और प्रति अंश रोकड़ प्रवाह के मध्य संबंध होता है। इस प्रकार,

Market Price to Cash Flow = Market Price per Share / Cash flow per Share

बाज़ार मूल्य को रोकड़ प्रवाह से अनुपात से अनुपात निवेश की गई मुद्रा की राशि का पुनर्भुगतान या भुगतान करने की फर्म की योग्यता की ओर संकेत करता है। बाज़ार मूल्य का रोकड़ प्रवाह से अनुपात का नमन होना वापिस भुगतान अवधि का अल्प होना दर्शाता है बाज़ार मूल्य का रोकड़ प्रवाह से अनुपात का उच्च होना वापिस भुगतान का दीर्घ होना दर्शाता है।

पूँजी सरचना का विश्लेषण अथवा उत्तोलक अनुपात (ANALYSIS OF CAPITAL STRUCTURE OR LEVRAGE RATIOS)

‘पूँजी सरचना’ पद वित्त-पोषण के विभिन्न दीर्घ-कालीन प्रारूपों के बीच संबंध को अभिव्यक्त करता है जैसे ऋणपत्र, पूर्वाधिकार अंश पूँजी और समता अंश एवं संचय व संचय व आधिक्य। संस्था की सम्पतियों का वित्त- पोषण प्रत्येक व्यवसाय की एक अति महत्वपूर्ण समस्या होती है। सामान्य नियम के रूप में संस्था की सम्पतियों के वित्त- पोषण करने में ऋण और समता पूँजी में एक उचित सम्मिश्रण होना चाहिए। एक संस्था की दीर्घ-कालीन वित्तीय स्थित का परीक्षण करने के लिए उत्तोलक अथवा पूंजी संरचना अनुपातों की गणना करते हैं।