कार इंश्योरेंस कैसे लें और कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए, आइए पढ़ें।

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Car Insurance How And What Should Take Care

कार इंश्योरेंस (Car Insurance) हम क्यों लेते हैं और कार इंश्योरेंस होता क्या है? अगर हमारी कार का कोई एक्सीडेंट हो जाए या और किसी वजह से नुकसान हो जाए तो इस कंडीशन में हम लोग अपनी कार की इंश्योरेंस करवाते हैं, या फिर हमारी गाड़ी चोरी हो जाती है जो बातें हमारी गाड़ी के लिए नुकसानदायक होती हैउन  नुकसानदायक चीजों से बचने के लिए हम कार इंश्योरेंस लेते हैं। जो भी हम कार इंश्योरेंस पॉलिसी लेते हैं उस पॉलिसी के अंतर्गत हमारी कार अगर डैमेज हो जाती है तो वह पॉलिसी हमें उसकी भरपाई करने में मदद करती है। इसीलिए हम कार इंश्योरेंस लेते हैं और इसके अंतर्गत आप की पॉलिसी का प्रीमियम कितना है उसका कवर कितना है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए हमें उस कार की पूरी कॉस्ट भी मिलती है। डिपेंड करता है आपकी कार पॉलिसी के ऊपर।

आइए अब जानते हैं कि आपका कार इंश्योरेंस पॉलिसी काम कैसे करता है। आप साल-दर-साल एक प्रीमियम भरते हैं। जरुरी नहीं है कि आप साल-दर-साल ही प्रीमियम भरे आप 6 महीने में भी भर सकते हैं। इन सब बातों का ध्यान जब हम कार इंश्योरेंस पॉलिसी लेते हैं उस समय दिया जाता है। प्रतिमाह भी आप प्रीमियम दे सकते हैं। परंतु यहां पर सबसे अच्छी प्रीमियम पॉलिसी देना केवल और केवल साल-दर-साल है, क्योंकि साल-दर-साल प्रीमियम हमें कम देना पड़ता है और यही प्रीमियम अगर हम प्रतिमाह या 6 महीने का देते हैं तो हमें महंगा पड़ता है।

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प्रीमियम क्या होता है जब आप किसी भी कंपनी से अपनी कार की इंश्योरेंस पॉलिसी करवाते हैं तो वह कंपनी आपको प्रतिमाह, 6 महीने के और प्रति वर्ष कुछ पैसे भरने को कहती है जिसे हम प्रीमियम कहते हैं। कार इंश्योरेंस पॉलिसी कई प्रकार की हो सकती हैं और हर पॉलिसी का प्रीमियम भी अलग अलग होता है अगर आप 25 वर्ष की कम आयु वाले ड्राइवर है तो आपको पॉलिसी का प्रीमियम ज्यादा भरना पड़ेगा। लेकिन इंश्योरेंस कंपनी के साथ हम और आप लोग प्रीमियम का अमाउंट एडजस्ट कर सकते हैं और यह हमारे ऊपर निर्भर होता है कि हम कितने प्रीमियम वाला पॉलिसी लेते हैं यहां पर बात ध्यान देने वाली है।  कार इंश्योरेंस पॉलिसी में जो भी पैसा हम प्रतिवर्ष भरते हैं वह हमें वापस नहीं मिलता है अगर हम अपनी पॉलिसी का क्लेम करना चाहते हैं। मतलब पैसा लेना चाहते हैं तो हमें एक्सेस अमाउंट भरना पड़ेगा। क्लेम क्या होता है मान लीजिए आपकी गाड़ी का कोई छोटा मोटा नुकसान हो जाता है और जब आप उस इंश्योरेंस कंपनी के पास एप्लीकेशन भरने जाते हैं और आप चाहते हैं कि इंश्योरेंस कंपनी आप के नुकसान की भरपाई करें उसे हम क्लेम बोलते हैं। अब इसमें भी दो प्रकार क्लेम होते हैं। एक होता है एग्रेड वैल्यू और दूसरा होता है मार्केट वैल्यू। एग्रेड वैल्यू क्या होता है जो आपके और इंश्योरेंस कंपनी के बीच में पॉलिसी लेते समय अमाउंट होता है उसे हम एग्रेड वैल्यू कहते हैं। मार्केट वैल्यू वह होती है जब आप अपनी गाड़ी को बेचना चाहते हैं तो उसकी मार्केट वैल्यू क्या होगी दोनों अलग-अलग बातें हैं।

एक्सेस क्या होता है। जब आप इंश्योरेंस कंपनी के पास क्लेम करने जाते हैं। मतलब जब भी आपकी गाड़ी का कोई नुकसान होता है और आप इंश्योरेंस कंपनी के पास क्लेम लेने जाते हैं तो आपको उस क्लेम अमाउंट के साथ एक एक्स्ट्रा कंट्रीब्यूशन में एक्सेस अमाउंट भरना पड़ता है और यह क्रिया स्थिति के अनुसार अलग-अलग होती है। एक्सेस अमाउंट के अंतर्गत अगर आप 25 साल से कम उम्र के ड्राइवर हैं और आप इंश्योरेंस कंपनी के पास क्लेम लेने जाते हैं तो यहां पर आपको एक्सेस अमाउंट के साथ एक और एक्स्ट्रा एज अमाउंट भी भरना पड़ता है। यह दोनों बातें ध्यान देने योग्य हैं जब आप अपनी कार की रजिस्ट्रेशन करवाने जाते हैं। इस कंडीशन में आपको कंपलसरी होता है कि आपको थर्ड पार्टी इंश्योरेंस भी अप्लाई करना पड़ता है।

कार इंश्योरेंस से संबंधित ध्यान देने योग्य बातें।

अगर आप अपना कार इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम बढ़ाना चाहते हैं तो यह किया जा सकता है।

कार इंश्योरेंस पॉलिसी का रिफंड भी मिल जाता है।

हर कार इंश्योरेंस पॉलिसी की रिफंड करने की क्रिया अलग-अलग होती है।

कार इंश्योरेंस रिफंड पॉलिसी का पता करना बहुत जरुरी होता है जब आप पॉलिसी लेते हैं।

आप अपनी कार इंश्योरेंस पॉलिसी कैसे अप्लाई करें।

आप कार इंश्योरेंस कंपनी के पास जाइये और उस कंपनी से फ्री कोड ले लीजिए। कोड लेना जरूरी होता है कोड लेने से आपका कोई भी एलोकेशन नहीं होगी। मतलब आप उनके साथ किसी भी प्रकार कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं कर रहे है। इसके बाद कार इंश्योरेंस कंपनी आपको प्रीमियम वैल्यू बताती है। मतलब आपको कितना प्रीमियम देना पड़ेगा कितना पैसा देना पड़ेगा। प्रीमियम देने की क्रिया प्रतिमाह या फिर साल-दर-साल हो सकती है। आपका प्रीमियम प्रतिवर्ष बदला भी जा सकता है। जब आप अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी की बात करने जाते हैं तो इन सब बातों पर ध्यान देना चाहिए और कंपनी वाले भी आपसे कुछ प्रश्न पूछ सकते हैं।

जैसे कि आपकी गाड़ी के बारे में आपने गाड़ी की कोई मॉडिफिकेशन करवाई है।

या फिर आपके अलावा भी कोई दूसरा गाड़ी को ड्राइव करता है।

आपने पहले कोई कार बीमा तो नहीं लिया है। इस गाड़ी का।

या फिर आपकी गाड़ी कभी चोरी हुई हो।

या फिर आपका ड्राइविंग लाइसेंस कभी कैंसिल भी किया गया हो।

या फिर सस्पेंडेड किया हो या डिस्क्वालीफाई किया हो।

आपने अपनी कार कहीं दूसरी जगह से तो नहीं फाइनेंस करवा रखी है।

इस तरह के प्रश्न आपसे पूछे जाने लाजमी है। 

अत्यधिक ध्यान देने योग्य बातें जब आप अपनी कार इंश्योरेंस करवाते हैं।

सबसे पहले आपको अलग-अलग कार इंश्योरेंस कंपनियों के बारे में सूचना इकट्ठी करनी चाहिए।

सूचना इकट्ठी करने के बाद हर कंपनी से कोड लेना चाहिए।

सभी कंपनियों से कार इंश्योरेंस में वह क्या ऑफर कर रहे हैं उसकी जानकारी लेनी चाहिए।

जो भी प्रश्न आपके दिमाग में है वह आप उनसे जरुर पूछिए।

आपका पूरा हक है कि आप उनसे हर प्रकार की जानकारी प्राप्त करें।

अच्छा रहेगा अगर आप अपने प्रश्नों की एक लिस्ट बना लें। उसके बाद कार इंश्योरेंस कंपनियों के साथ संपर्क करना शुरू करें।

यह जानना भी जरूरी है कि कार इंश्योरेंस कंपनी आपकी पॉलिसी में क्या-क्या कवर करने जा रही है।

जब आपको पॉलिसी मिल जाती है तो इस बात का ध्यान देना बहुत जरुरी है कि उस पॉलिसी के खत्म होने से पहले आपको अपना प्रीमियम भरना पड़ेगा। नहीं तो आप घाटे में रहोगे। 

जब आप इंश्योरेंस कंपनी को अपना प्रीमियम भरना शुरू कर देते हैं और कहीं आप अपना क्लेम लेने जाते हैं तो इस कंडीशन में कार इंश्योरेंस कंपनी आपके एक्सेस अमाउंट को रिड्यूस करके आपको क्लेम देती है। आप अपनी इंश्योरेंस कंपनी के प्रति हमेशा विश्वास बनाकर रखें। जो भी आपकी भरपाई होगी वह कार इंश्योरेंस कंपनी करती है। आप विनम्र पूर्वक कार के नुकसान के बारे में बताएं। आप उनको पूरी जानकारी दें कुछ भी मत छुपाओ। इसके बाद आप क्लेम कैसे कर सकते हैं। क्लेम करने की प्रक्रिया क्या है। क्लेम करने के लिए आप सबसे पहले गाड़ी कैसे डैमेज हुई। क्या-क्या नुकसान हुआ है। पुलिस रिपोर्ट। अपनी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर अगर कार एक्सीडेंट हुआ है तो दूसरी कार का भी रजिस्ट्रेशन नंबर चाहिए होगा। सारी इनफार्मेशन आपको इकट्ठी करके ही क्लेम के लिए जाना चाहिए। ऐसा भी हो सकता है कि आपकी जो इंश्योरेंस कंपनी है आप उस से सहमत ना हो तो इस स्थिति में एक सर्विस प्रोवाइडर फ्रॉम होता है। यह एक अलग प्रकार की संस्था है आप इनके पास जा सकते हैं या फिर इनको फोन कर सकते हैं आप उनके पास अपनी कार इंश्योरेंस कंपनी की शिकायत भी कर सकते हैं। वह आपकी पूरी मदद करेंगे। आपको अन्य तरीका बताएंगे और आपको जो दिक्कत है उस दिक्कत को दूर करने में आपकी सहायता करेंगे। इस तरह की जानकारी हम लोगों को रखना बहुत ही जरूरी है और यही सब बातें एक कार पॉलिसी के लिए सबसे अच्छी बातें हैं। धन्यवाद आप नीचे कमेंट बॉक्स में भी लिख सकते हैं।

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