महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना हिमाचल प्रदेश।

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The Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme Himachal Pradesh at alloverindia.in website

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत सामाजिक क्या-क्या कार्य होते हैं। किस तरह से आप इनके साथ जुड़ सकते हैं। इसकी भरपूर जानकारी आपको हम प्राप्त करवाने जा रहे हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल रोजगार उपलब्ध करवाने की दिशा में एक कारगर पहल सिद्ध हुआ है। यह पहला कार्यक्रम है जिस में सामाजिक अंकेक्षण का कानूनी प्रावधान जिम्मेदारी निर्धारण तथा पारदर्शिता की परिदृश्य से किया गया है। सामाजिक लेखा परीक्षा की जिम्मेवारी ग्रामसभा को सौंपी गई है जो कि एक समिति के माध्यम से इस कार्यकलाप को अंजाम देती है। कालांतर से यह महसूस किया गया है की ग्राम पंचायत सभा सामाजिक अंकेक्षण समिति के स्तर पर इस कार्य हेतु समुचित जानकारी क्षमता और दृष्टिकोण का नितांत अभाव है। इसी अभाव के अंतर को दूर करने की अपेक्षा से हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा सामाजिक अंकेक्षण की जानकारी हम आपको “ऑल ओवर इंडिया वेबसाइट” के माध्यम से उपलब्ध करवा रहे हैं। निगरानी सतर्कता समिति तथा सामाजिक अंकेक्षण समिति के लिए समस्त जानकारी नियम तथा रिपोर्ट तैयार करने का एक नमूना प्रति आसान भाषा में हम आपको उपलब्ध करवाने जा रहे हैं। विभिन्न रिकॉर्ड जोकि ग्राम पंचायत स्तर पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना हिमाचल प्रदेश 2006 के अनुरूप तैयार किए जाने हैं। तथा हिमाचल प्रदेश सामाजिक अंकेक्षण नियम 2009 के अनुरूप निर्धारित कार्य प्रणाली के अनुसार सामाजिक लेखा परीक्षा की अधिसूचित प्रक्रिया को ध्यान में रखकर इस नियमावली को तैयार किया गया है। समय-समय पर ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ किए गए संबाद तथा राज्य ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा आयोजित किए गए क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आधार पर शक्षम प्रशिक्षण आवश्यकता को ध्यान में रखकर हम आपको सारी जानकारी उपलब्ध करवाने जा रहे हैं।

The Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme Himachal Pradesh.

श्री सतीश चंद शर्मा उपनिदेशक के निर्देशन तथा मार्गदर्शन के अंतर्गत इस जानकारी का लेखन श्री राजीव बंसल अनुसंधान अधिकारी के अथक प्रयासों के कारण संभव हो पाया है। जिसमें आसिया रहमान और बिंदू रानी युवा व्यवसाई का भी योगदान सराहनीय रहा है। इस सारे कार्य में सचिवीय सहायता श्री प्रेम राज चौहान तथा आशु लिपिक द्वारा प्रदान की गई। हम आशा करते हैं कि सामाजिक अंकेक्षण की जानकारी ग्रामीण विकास पंचायतीराज अन्य संबंध विभाग तथा सभी हितधारकों के लिए सहायक और उपयोगी सिद्ध होगा इस परीदृष्टि में आप सभी की प्रतिक्रिया टिप्पणियों तथा बहुमूल्य सुझाव हमारे लिए अधिक उपयोगी होंगे।

सामाजिक संपरीक्षा Social Audit

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना 2006 हिमाचल प्रदेश के अंतर्गत सामाजिक लेखा परीक्षा सोशल ऑडिट। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है कि योजना के कार्यान्वयन में ग्राम पंचायत में करवाए जा रहे सभी कार्यो का सोशल आडिट ग्रामसभा के द्वारा किया जाएगा सोशल ऑडिट का अर्थ ग्राम सभा द्वारा ग्राम पंचायत क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों की उपयोगिता गुणवत्ता और उन पर हुए खर्चे की जांच परख करने तथा आने वाले समय में कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सुझाव देने की प्रक्रिया को सामाजिक लेखा परीक्षा या सोशल ऑडिट कहते हैं। सोशल ऑडिट या सामाजिक संपरीक्षा से क्या मतलब है ग्राम सभा द्वारा ग्राम पंचायत में चल रहे विकास के मुद्दों तथा योजनाओं को समझने योजना के नियोजन से लेकर काम के पूरा होने तक की जांच, गुणवत्ता उन पर हुए खर्चे की स्थानीय समुदाय द्वारा जांच परख करना सोशल ऑडिट है।

सोशल ऑडिट एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें स्कीम को लागू करते समय सक्षम की कमियों से सीख लेकर भविष्य में स्कीम को प्रभावी रुप से लागू किया जाए। सोशल ऑडिट एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। सोशल आडिट से बनी समाज और सीख के आधार पर कार्यक्रम में विकास से संबंधित सभी पहलुओं को नई दिशा देने को सोशल ऑडिट कहते हैं।



सोशल ऑडिट के उदेश्य: सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं में लोगों के प्रति जवाबदेही बढ़ाना। लोगों की भागीदारी को बढ़ाना तथा समुदाय को अपने अधिकारों के उपयोग के प्रति जागरुक करना योजना के अंतर्गत कार्य में निर्णय लेने में पारदर्शिता को सुनिश्चित करना कार्य में हो रही अनियमितताओं और कमियों को दूर करना। स्थानिय बिकास कार्यक्रमों को प्रभावशाली ढंग से लागू करना। सोशल आडिट के लाभ: गांव के लोगों को विकास कार्यों की जानकारी मिलती है और ग्राम पंचायत के कार्यो में पारदर्शिता आती है गांव के लोग गांव के विकास के काम करनेवाली पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों से प्रश्न कर सकते हैं। जिससे जवाबदेही बढ़ती है। सोशल आडिट में हितभागियों विशेषकर गरीब एवं हाशिए पर पड़े हुए लोगों की आवाज तथा राय को सर्वोच्च मानयता दी जाती है। विकास कार्य में गांव के लोगों की भागीदारी को बढ़ावा मिलता है। यदि कार्यों में कहीं गड़बड़ी या कमियां पाई जाती हैं या किसी को कोई शिकायत है तो उसका निपटारा होता है। ग्राम पंचायत तथा कार्यकारी संस्थाएं भी ग्रामसभा के सामने अपनी समस्याओं को रख सकती है। एवं सरकारी अधिकारियों और लोगों का सहयोग प्राप्त कर सकती हैं। विकास के कार्यों के नियोजन गुणवत्ता खर्चे आदि पहलुओं पर चर्चा तथा महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

सोशल ऑडिट कब हो सकता है। सोशल ऑडिट लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। हिमाचल प्रदेश सोशल आडिट नियमों के अनुसार वर्ष में ग्राम सभा की चारों बैठकों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम का सोशल ऑडिट करना जरूरी है। सोशल आडिट समिति के सदस्य कौन होंगे सोशल ऑडिट ग्राम सभा द्वारा गठित सोशल ऑडिट कमेटी द्वारा किया जाएगा। सोशल आडिट समिति में कम से कम 9 सदस्यों का होना आवश्यक है। जो कि ग्राम पंचायत के प्रधान – उपप्रधान या वार्ड सदस्य नहीं हो सकते। पंचायती राज अधिनियम 1994 के अंतर्गत ग्राम पंचायत में बनी सतर्कता समिति के सभी सदस्य भी सोशल आडिट समिति के सदस्य होंगे समिति में कम से कम दो ऐसे कामगारों को लिया जाए जिन्होंने पंचायत में नरेगा के अंतर्गत चालू या पुरे हुए कार्यों में काम किया हो। समिति में एक तिहाई महिला सदस्यों का होना आवश्यक है। ग्राम पंचायत में तैनात पंचायत सचिव सहायक सामाजिक अंकेक्षण समिति का सदस्य सचिव होगा। समिति अपनी पहली बैठक में सदस्यों में से एक व्यक्ति को कार्य संचालन हेतु अध्यक्ष चुनेगी।

सोशल ऑडिट कैसे किया जाता है।

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