पीड़ा रोगों का उपचार।

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Regular Treatment of Pain Disorders Alloverindia.in

हिप्नोटिज्म (Hypnotism) द्धारा हर पीड़ा का उपचार किया जा सकता है। थोड़े दर्द को तो एक ही बैठक में ठीक किया जा सकता है। यदि रसौली जैसे रोग की पीड़ा हो तो हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का उपचार काम न करके ऑपरेशन का उपचार ही काम करेगा।



रोगियों से

यदि आप किसी प्रकार की पीड़ा से दुःखी हैं तो इस दर्द को प्रारम्भ में ही काबू में लाने का प्रयास करें। हमारे देश में तो विशेषकर यह रिवाज़ है कि जब तक दर्द हद से न बढ़ जाए तब तक हम डॉक्टर के पास जाते ही नहीं। यह धारणा सिरे से ही गलत है। यदि आप किसी भी रोग से दुःखी हैं तो उसके शुरू होते ही डॉक्टर के पास जाएँ। रोग के बढ़ने की प्रतीक्षा न करें और न ही यह सोचें कि यह अपने आप ही ठीक हो जाएगा।

यदि आपके शरीर में कोई भी रोग पनपने लगता है तो उस समय किसी भी अच्छे डॉक्टर से सलाह लें। अक्सर लोग घरों में बैठे – बैठे ही यह सोचते  रहते हैं कि आज नहीं तो कल मेरा रोग ठीक हो जाएगा। भला आजकल यह कहाँ संभव है?

साधाहरण दर्द के साथ यदि किसी रोगी को दौरे भी पड़ते हों तो ऐसे रोगी को अपने सामने वाली कुर्सी पर बैठा दें फिर उस पर हिप्नोटिज्म करें।

जैसा कि आपको पहले भी बताया जा चुका है। रोगी को सामने बैठाकर जब आप उसे हिप्नोटिज्म (Hypnotism) कर देते हैं तो उसे कहना शुरू करें -“तुम्हारा दर्द गायब हो रहा है। हाँ …. हाँ …. दर्द हट रहा है। तुम्हें आराम रहा अब तुमठीक हो जाओगे। तुम इस समय मीठी नींद सो रहे हो। अब तुम जागोगे तो तुम्हारा दर्द ठीक हो चुका होगा। अब मैंतुम्हें जगाता हूँ। आँखे खोलो … आँखे खोलो …आँखे खोलो …।”

इस प्रकार जब रोगी अपनी आँखे खोलेगा तो उसे सर्वप्रथम अपने डॉक्टर का हँसता हुआ मुखड़ा नजर आएगा और वह आप से कहेगा -“धन्यवाद डॉक्टर! मैं ठीक हो गया हूँ।

खानापीना

रोग कोई भी हो उस पर खाने – पीने का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है। इसलिए अपने रोगी को हल्की – फुल्की खुराक के लिए ही सलाह दें। जैसे – अधिक से अधिक हरी सब्जियाँ खाना, फूलों का जूस, फल, अंडा, टमाटर का सूप, गाजर का जूस, दाल – रोटी आदि का सेवन अधिक करने की सलाह दें। माँस का सेवन बंद करवा दें।

साधाहरण दर्द

साधाहरण दर्द के रोगी तो आपके पास बहुत आएगें। ऐसे लोग दर्द भगाने की अनेक सस्ती दवाइयाँ आ रही हैं जिन्हें खाकर दर्द भगाने का प्रयत्न करते हैं जो की स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं होती। ऐसे रोगियों को यह सलाह दी जाती है कि इस प्रकार के रोगों के लिए हिप्नोटिज्म (Hypnotism) के डॉक्टर से सम्पर्क करें।

ऐसा कोई रोगी यदि आपके पास आता है तो आप उस रोगी से कहें कि -“आओ …… आओ …… मैं आपका दर्द ठीककरता हूँ।” अब रोगी को आराम से कुर्सी पर बैठा दें और उससे कहें कि वह अपने पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें और अपनी आँखे बंद कर ले। अब उसके माथे पर धीरे – धीरे हाथ फेरकर कहते रहें कि -“आपका दर्द गायब हो रहा है। दर्द भाग रहा है। आप ठीक हो रहे हो। हाँ ….  हाँ …. आप ठीक हो चुके हो। चिंता मत करो। अब आप ठीक हो। अपनी आँखे खोलो और मन से पूछो कि क्या मैं ठीक हो गया हूँ? तुम्हारा मन यही कहेगा कि तुम ठीक हो गए हो।

हकलाना रोग

हकलाना रोग कभी – कभी लम्बे बुखार की कमजोरी के कारण शुरू होता है। कभी मुँह पर फाजिल गिरने के कारण भी जुबान लड़खड़ाने लगती है। ऐसे रोग का उपचार हिप्नोटिज्म (Hypnotism) के द्धारा किया जा सकता है। इस रोग का उपचार बड़ी सावधानी से कई बार के नुस्खों द्धारा होता है। एक दिन में इस रोग का उपचार संभव नहीं है।

पहले रोगी हो हिप्नोटाइज (Hypnotize) करें फिर उसे आदेश दें -“आपकी जुबान अब ठीक हो जाएगी। तुम अब साफ – साफ बातें करोगे। तुम्हारा रोग भाग चुका है। अब तुम कभी भी हकलाओगे नहीं। अब तुम बिना झिझक बातें करोगे। अब तुम बोलने से मत डरना। तुम्हारा नाम क्या है? (रोगी आपको अपना नाम बताएगा)

देखो … (उसका नाम लेकर) अब मैं तुम्हें जगा रहा हूँ। अब तुम नींद से जाग जाओ। वह रोगी जैसे ही जागेगा आप उससे बात करोगे तो वह साफ बोलेगा और बहुत खुश होगा कि उसका हकलाना बंद हो चुका है। इस रोग में कम से कम 90 दिन का हिप्नोटिज्म (Hypnotism) कोर्स माना गया है। इसलिए रोगी को पूर्ण विश्वास में रखें कि तुम शीघ्र ठीक होने वाले हो और धीरे – धीरे ठीक हो रहे हो।”